नए वैश्विक अध्ययन में नहीं मिला कैंसर का कोई प्रमाण
13 वैज्ञानिक अध्ययनों की समीक्षा के बाद डब्ल्यूएचओ अध्ययन में आया निष्कर्ष
जा. ब्यूरो
नई दिल्ली। मोबाइल फोन से निकलने वाली विद्युत चुंबकीय तरंगों (रेडियो तरंगों) को लेकर लंबे समय से बनी कैंसर की आशंकाओं को नए वैज्ञानिक अध्ययन ने काफी हद तक खारिज कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की पहल पर कराए गए 13 वैज्ञानिक समीक्षा अध्ययनों के निष्कर्षों का विश्लेषण करने वाले नए अध्ययन में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला कि मोबाइल फोन से निकलने वाली विद्युत चुंबकीय तरंगें मस्तिष्क, सिर या गर्दन के कैंसर का कारण बनती हैं।
रेडियो तरंगें विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम का कम ऊर्जा वाला हिस्सा हैं। इन्हीं की मदद से मोबाइल फोन, वाई-फाई, रेडियो, जीपीएस और अन्य वायरलेस संचार प्रणालियां काम करती हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इन तरंगों में ऊर्जा का स्तर एक्स-रे या गामा किरणों जैसे उच्च ऊर्जा वाले विकिरण की तुलना में बहुत कम होता है, जो डीएनए को सीधे नुकसान पहुंचाकर कैंसर का कारण बन सकते हैं।
मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग के साथ पिछले दो दशकों से यह चिंता जताई जाती रही है कि लंबे समय तक फोन को कान से लगाकर इस्तेमाल करने से मस्तिष्क कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। इसी को देखते हुए वर्ष 2019 में डब्ल्यूएचओ ने उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों की व्यापक समीक्षा कराने का निर्णय लिया था।
नए विश्लेषण में इन सभी अध्ययनों के निष्कर्षों की समीक्षा के बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियो तरंगों और कैंसर के बीच कोई विश्वसनीय संबंध स्थापित नहीं होता है। अध्ययन में मस्तिष्क, सिर और गर्दन के कैंसर के जोखिम में वृद्धि का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला।
विशेषज्ञों का कहना है कि कम ऊर्जा वाले विद्युत चुंबकीय विकिरण को लेकर चिंताएं शीत युद्ध के दौर से चली आ रही हैं, जब माइक्रोवेव तकनीक और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तेजी से आम लोगों तक पहुंचे थे। हालांकि बाद के वैज्ञानिक अध्ययनों में भी कम ऊर्जा वाले विकिरण के संपर्क से स्वास्थ्य पर कोई स्पष्ट और लगातार हानिकारक प्रभाव साबित नहीं हो सका।
वैज्ञानिक यह भी स्पष्ट करते हैं कि माइक्रोवेव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए पहले से ही सुरक्षा मानक तय हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि इनसे निकलने वाला विकिरण सुरक्षित सीमा के भीतर रहे। ये मानक उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्य यह संकेत देते हैं कि सामान्य परिस्थितियों में मोबाइल फोन और अन्य वायरलेस उपकरणों से निकलने वाली कम ऊर्जा वाली विद्युत चुंबकीय तरंगें कैंसर का कारण नहीं बनती हैं।
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